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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 18
दण्ड: शास्ति प्रजाः सर्वा दण्ड एवाभिरक्षति । दण्डः सुप्तेषु जागर्ति दण्डं धर्म विदुर्बुधाः ।।
दण्ड ही सब प्रजाओं का शासन करता है, दण्ड ही सब (प्रजाओं) की रक्षा करता है, सबके सोते रहने पर दण्ड ही जागता है (क्योंकि उसी दण्ड के भय से चोर आदि चोरी आदि दुष्कर्म नहीं करते); विद्वान्‌ लोग दण्ड को धर्म (का हेतु) समझते हैं।
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