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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 118
यानि राजप्रदेयानि प्रत्यहं ग्रामवासिभिः । अन्नपानेन्धनादीनि ग्रामिकस्तान्यवाप्नुयात्‌ ।।
ग्रामवासी प्रजा राजा के लिए जो अन्न, इन्धन आदि देते हों, उसे वह एक गाँव का रक्षक लेवे।
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