(भृगु मुनि महर्षियों से कहते हैं कि-) भृत्यों (अपने अधीनस्थ, अमात्यादि) के साथ प्रजा की रक्षा करनेवाले राजा का जो-जो कर्तव्य है, वह वह क्रम से शास्त्रानुसार मैं आप लोगों से कहूँगा।
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