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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 88
समोत्तमाधमै राजा त्वाहूतः पालयन्प्रजाः । न निवर्तेत संग्रामात्क्षात्रं धर्ममनुस्मरन्‌ ।।
प्रजाओं का पालन करता हुआ राजा समान, अधिक या कम (बल वाले शत्रुओं) के बुलाने (युद्ध के लिए ललकारने) पर (क्षत्रिय युद्ध से विमुख न होवे' इस) कषत्त्रिय-धर्म को स्मरण करता हुआ युद्ध से विमुख न होवे।
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