मध्यन्दिनेऽर्धरात्रे वा विश्रान्तो विगतक्लमः ।
चिन्तयेद्धर्मकामार्थान्सार्थं तैरेक एव वा ।।
मध्याह्न में या आधीरात को मानसिक खेद तथा शारीरिक खिन्नता से हीन होकर (राजा) उन (मन्त्रियों) के साथ में या अकेला ही धर्म, अर्थ और काम का चिन्तन करे।
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