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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 132
पत्रशाकतृणानां च कर्मणां वैदलस्य च । मृण्मयानां च भाण्डानां सर्वस्याश्ममयस्य च ।।
पत्ता, शाक, घास, चमड़ा, बाँस तथा मिट्टी के बर्तन और पत्थर की बनी सभी वस्तुओं का छठा भागकर रूप में ग्रहण करे।
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