ये कार्यिकेभ्यो5 र्थमेव गृह्णीयुः पापचेतसः ।
तेषां सर्वस्वमादाय राजा कुर्यात्रवासनम् ।।
जो पापबुद्धि अधिकारी काम पड़ने वालों से (अनुचित रूप में) धन अर्थात् घूस ले, राजा उनका सर्वस्व लेकर उन्हें राज्य से बाहर निकाल दे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।