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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 61
निर्वर्तेतास्य यावद्धिरितिकर्तव्यता नृभिः । तावतोऽतन्द्रितान्दक्षान्प्रकुर्वीत विचक्षणान्‌ ।।
इस (राजा) का कार्य जितने मनुष्यों से पूरा हो; आलस्य रहित, कार्य करने में उत्साही और काम के जानकार उतने ही मनुष्यों को (मन्त्री पद पर) नियुक्त करे।
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