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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 154
कृत्स्नं चाष्टविधं कर्म पञ्चवर्गं च तत्त्वतः । अनुरागापरागौ च प्रचार मण्डलस्य च ।।
(राजा) आठ प्रकार के सब कर्म, पञ्चवर्ग, अनुराग, अपराग और राजमण्डल के प्रचार का वास्तविक रूप से (चिन्तन करे)।
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