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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 145
उत्थाय पश्चिमे यामे कृतशौचः समाहितः । हुतारिनर्ब्राह्मणांश्चार्च्य प्रविशेत्स शुभां सभाम्‌ ।।
(राजा) रात्रि के अन्तिम पहर में उठकर शौच (शौच, दन्तधावन एवं स्नानादि नित्यकर्म) करके अग्नि में हवन और ब्राह्मणों की पूजाकर शुभ (वास्तुलक्षण से युक्त) सभा (मंत्रणा-गृह) में प्रवेश करे।
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