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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 31
शुचिना सत्यसन्धेन यथाशास्त्रानुसारिणा । प्रणेतुं शक्यते दण्डः सुसहायेन धीमता ।।
धनादि के विषय में शुद्ध, सत्यप्रतिज्ञ, शास्त्रानुसार व्यवहार करनेवाला, अच्छे सहायकोंवाला और बुद्धिमान्‌ (राजा आदि) के द्वारा दण्ड का प्रयोग किया जा सकता है।
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