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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 180
यदि तत्रापि सम्पश्येद्दोषं संश्रयकारितम्‌ । सुयुद्धमेव तत्रापि निर्विशङ्कः समाचरेत्‌ ।।
जब राजा उक्त प्रकार से (७।१७४-१७५) संश्रय करने पर भी दोष, अपनी कार्य सिद्धि का अभाव) देखे; तब निर्भय होकर उस (दुर्बल) अवस्था में भी पूरी शक्ति के साथ युद्ध करे।
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