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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 45
दश कामसमुत्थानि तथाऽष्टौ क्रोधजानि च । व्यसनानि दुरन्तानि प्रयत्नेन विवर्जयेत्‌ ।।
(राजा) कामजन्य दश तथा क्रोधजन्य आठ, अन्त में दुःखदायी व्यसनों को प्रयत्नपूर्वक त्याग कर दे।
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