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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 214
प्राज्ञ कुलीनं शूरं च दक्षं दातारमेव च । कृतज्ञ धृतिमन्तं च कष्टमाहुररिं बुधाः ।।
विद्वान्‌, कुलीन, शूरवीर, चतुर, दानी, कृतज्ञ और (सुख-दुःख में) धैर्ययुक्त शत्रु को विद्वान्‌ लोग कष्टसाध्य (कठिनता से जीतने योग्य) कहते हैं । (अतएव ऐसे शत्रु से सन्धि कर लेना चाहिये)।
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