दण्ड के विभ्रम (अभाव या अनुचित प्रयोग) से सब वर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय आदि) दूषित (परस्री- सम्भोग से वर्णसङ्कर) हो जाँय, सब मर्यादाएँ (चतुर्वर्गफल प्राप्ति का कारणभूत नियम) छिन्न-भिन्न हो जायें और सब लोगों में (चोरी, डाका, व्यभिचार आदि से) क्षोभ उत्पन्न हो जाय।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।