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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 25
यत्र श्यामो लोहिताक्षो दण्डश्चरति पापहा । प्रजास्तत्र न मुह्यन्ति नेता चेत्साधु पश्यति ।।
श्याम वर्ण (शरीरवाला), लाल नेत्रोंवाला (दण्ड का स्वरूप ऐसा शास्त्रं में वर्णित है) और पापनाशक दण्ड जिस देश में विचरण करता (राजा आदि शासकों के द्वारा प्रयुक्त किया जाता है) है, उस देश में यदि नेता (राजा आदि शासक) उचित दण्ड देता है तो (वहाँ रहनेवाली) प्रजा दुःखित नहीं होती है।
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