मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 52
सप्तकस्यास्य वर्गस्य सर्वत्रैवानुषङ्गिणः । पूर्व पूर्व गुरुतरं विद्याद्व्यसनमात्मवान्‌ ।।
सम्पूर्ण राजमण्डल में रहने वाले इन सात व्यसन-समुदाय (चार कामजन्य व्यसन समुदाय-दे० ७।५० और तीन क्रोधजन्य व्यसन-समुदाय दे० ७।५१) में से पूर्व-पूर्व (अगले की अपेक्षा पहले वाले) को जितेन्द्रियपुरुष गुरुतर अधिक कष्टदायक समझे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें