सप्तकस्यास्य वर्गस्य सर्वत्रैवानुषङ्गिणः । पूर्व पूर्व गुरुतरं विद्याद्व्यसनमात्मवान् ।।
सम्पूर्ण राजमण्डल में रहने वाले इन सात व्यसन-समुदाय (चार कामजन्य व्यसन समुदाय-दे० ७।५० और तीन क्रोधजन्य व्यसन-समुदाय दे० ७।५१) में से पूर्व-पूर्व (अगले की अपेक्षा पहले वाले) को जितेन्द्रियपुरुष गुरुतर अधिक कष्टदायक समझे।
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