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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 56
तैः सार्धं चिन्तयेन्नित्यं सामान्यं सन्धिविग्रहम्‌ । स्थानं समुदयं गुप्तिं लब्धप्रशमनानि च ।।
(राजा) उन मन्त्रियों के साथ में सन्धि-विग्रह (षड्गुण), स्थान, समुदय, गुप्ति और मिले हुए का उपयोग, इनका चिन्तन (सलाह-मसविरा अर्थात्‌ परामर्श) करे।
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