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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 58
सर्वेषां तु विशिष्टेन ब्राह्मणेन विपश्चिता । मंत्रयेत्परमं मन्त्रं राजा षाङ्गण्यसंयुतम्‌ ।।
राजा उन मन्त्रियों में से विद्वान्‌ धर्मादि युक्त विशिष्ट एक ब्राह्मण के साथ षड्गुण (७।१६०) से युक्त श्रेष्ठ मन्त्र (गुप्त विचार) की मन्त्रणा (विचार-विनिमय) करे।
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