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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 11
यस्य प्रसादे पद्मा श्रीर्विजयश्च पराक्रमे । मृत्युश्च वसति क्रोधे सर्वतेजोमयो हि सः ।।
जिस (राजा) की प्रसन्नता से लक्ष्मी, पराक्रम में विजय और क्रोध में मरण रहते हैं, अत: वह राजा सर्वतेजोमय है।
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