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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 87
देशकालविधानेन द्रव्यं श्रद्धासमन्वितम्‌ । पात्रे प्रदीयते यत्तु तद्धर्मस्य प्रसाधनम्‌ ।।
देश-काल के अनुसार श्रद्धा से युक्त जो द्रव्य सत्पात्र में दिया जाता है, वही धर्म का प्रसाधन (उत्तम साधन या भूषण) है।
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