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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 55
अपि यत्सुकरं कर्म तदप्येकेन दुष्करम्‌ । विशेषतोऽसहायेन किं न राज्यं महोदयम्‌ ।।
जो कार्य सरल है, वह भी एक आदमी के लिए कठिन होता हे । विशेषकर महान्‌ फल को देनेवाला राज्य असहाय (अकेले राजा) से कैसे सुसाध्य हो सकता है? (कदापि नहीं हो सकता अतः राजा को पूर्व श्लोक में वर्णित गुणों बाले मन्तरियों को नियुक्त करना चाहिए)।
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