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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 176
यदा तु स्यात्परिक्षीणो वाहनेन बलेन च । तदाऽऽसौत प्रयत्नेन शनकैः सांत्वयन्नरीन्‌ ।।
जब राजा हाथी आदि वाहनों (सवारियों) से तथा अमात्य आदि शक्तियों से अपने को अत्यन्त क्षीण (दुर्बल) समझे तब यत्नपूर्वक शत्रु को शान्त करता हुआ चुप होकर बैठ जावे।
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