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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 81
अध्यक्षान्विविधान्कुयत्तत्र तत्र विपश्चितः । तेऽस्य सर्वाण्यवेक्षेरन्नणां कार्याणि कुर्वताम्‌ ।।
(राजा) उन-उन कार्यो (सेना, कोष संग्रह, दूतकार्य आदि) में अनेक प्रकार के अध्यक्षों को नियुक्त करे तथा वे अध्यक्ष इस राजा के सब कार्यो को देखा करे।
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