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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 109
सामादीनामुपायानां चतुर्णामपि पण्डिताः । सामदण्डौ प्रशंसन्ति नित्यं राष्ट्राभिवृद्धये ।।
पण्डित (राजनीतिज्ञ विद्वान्‌) साम आदि चारो उपायों (साम, दाम, भेद और दण्ड) में से सर्वदा राज्य की वृद्धि के लिए साम और दण्ड की प्रशंसा करते हैं।
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