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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 74
एकः शतं योधयति प्राकारस्थो धनुर्धरः । शतं दशसहस्राणि तस्माहुर्ग विधीयते ।।
(जिस कारण से) किले में रहने वाला एक धनुर्धारी (योद्धा) सौ योद्धाओं से और सो धनुर्धारी योद्धा दस हजार योद्धाओं से लड़ता है, इस कारण राजनीतिज्ञ दुर्ग की प्रशंसा करते हैं।
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