इस संसार में जो कुछ कार्य हैं, वे सब भाग्य तथा मनुष्य के अधीन हैं; उनमें दैव (पूर्वजन्मकृत) कार्य अचिन्त्य हैं (कब क्या होने वाला है, इसे कोई नहीं जानता) और मानुष (मनुष्य सम्बन्धी अर्थात् वर्तमान में किया जाने वाला) कार्य में पर्यालोचन है (अतएव मनुष्य को स्व-कार्य-सिद्धि के लिए यत्न करते रहना चाहिये)।
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