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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 2
ब्रां प्राप्तेन संस्कारं क्षत्रियेण यथाविधि । सर्वस्यास्य यथान्यायं कर्तव्यं परिरक्षणम्‌ ।।
शास्तरानुसार वेद को प्राप्त (उपनयन संस्कार से युक्त) क्षत्रिय (अभिषिक्त राजा) न्यायपूर्वक (अपने राज्य में रहनेवाली) सब प्रजा की रक्षा करे।
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