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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 99
एषोऽनुपस्कृतः प्रोक्तो योधधर्मः सनातनः । अस्माद्धर्मान्न च्यवेत क्षत्रियो घ्नन्‌ रणे रिपून्‌ ।।
(भृगु मुनि महर्षियों से कहते हैं कि) अनिन्दित योद्धाओं का यह सनातन धर्म (मैंने) आप लोगों से कहा, युद्ध में शत्रुओं को मारता हुआ राजा इसे न छोड़े।
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