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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 117
विंशतीशस्तु तत्सर्वं शतेशाय निवेदयेत्‌ । शंसेद्ामशतेशस्तु सहस्रपतये स्वयम्‌ ।।
बीस गावो का रक्षक सौ गाँवों के रक्षक को और सौ गाँवों का रक्षक हजार गाँवों के रक्षक को स्वयं (बिना पूछे ही) उक्त चोर आदि के उपद्रवों को शीघ्र सूचित करे।
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