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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 224
एवं प्रयत्नं कुर्वीत यानशय्यासनाशने । स्नाने प्रसाधने चैव सर्वालङ्कारकेषु च ।।
राजा (अपने) यान (सवारी अर्थात्‌ रथ, अश्व, गज आदि), शय्या (पलँग या शयनगृह); आसन (बैठने के सिंहासन या अन्य चौकी आदि), अशन (भोजन); स्नान, प्रसाधन (तेल आदि का मर्दन या चन्दन आदि का) लेपन और सब प्रकार के भूषणों के धारण करने में इसी प्रकार अच्छी तरह परीक्षा कर उन्हें अपने व्यवहार में लाने का प्रबन्ध करे।
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