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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 3
अराजके हि लोकेऽ स्मिन्सर्वतो विद्रुते भयात्‌ । रक्षार्थमस्य सर्वस्य राजानमसृजत्प्रभुः ।।
इस संसार को बिना राजा के होने पर बलवानों के डर से (प्रजाओं के) इधर-उधर भागने पर सम्पूर्ण चराचर की रक्षा के लिए भगवान्‌ ने राजा की सृष्टि की।
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