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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 97
रथाश्वं हस्तिनं छत्रं धनं धान्यं पशून्सतरियः । सर्वद्रव्याणि कुप्यं च यो यज्जयति तस्य तत्‌ ।।
रथ, घोड़ा, हाथी, छत्र, धन, धान्य (सब प्रकार के अन्न), पशु (गौ, भैंस आदि), खनियाँ (दासी आदि), सब तरह के द्रव्य (गुड़, नमक आदि) और कुष्य (सोना-चाँदी के अतिरिक्त अन्य ताँबा-पीतल आदि द्रव्य) को जो योद्धा जीतकर लाता है; वह उसी का होता है । (सोना, चाँदी, भूमि, रत्न आदि बहुमूल्य वस्तुएँ राजा की होती हैं)।
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