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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 57
तेषां स्वं स्वमभिप्रायमुपलभ्य पृथक्‌ पृथक्‌ । समस्तानां च कार्येषु विदध्याद्धितमात्मनः ।।
(राजा) उन (मन्त्रियों) के अभिप्राय को (एकान्त में) अलग-अलग तथा सबों के अभिप्राय को इकट्ठा जानकर अपना हितकारी कार्य करे।
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