(राजा) वेदाध्ययन के बाद गुरुकुल से गृहस्थाश्रम मैं प्रविष्ट होने वाले ब्राह्मणों की पूजा (धन-धान्य-गृहादि को देकर आदर-सत्कार) करे; क्योंकि यह ब्राह्मण राजा का अक्षय निधि (खजाना) कहा गया है।
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