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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 155
मध्यमस्य प्रचारं च विजिगीषोश्च चेष्टितम्‌ । उदाक्षीनप्रचारं च शत्रोश्चैव प्रयत्नतः ।।
राजा मध्यम, उदासीन और शत्रु के प्रचार तथा विजिगीषु की चेष्टा का चिन्तन (परज्ञान एवं प्रतिकार) करे।
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