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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 228
तत्र भुक्त्वा पुनः किंचित्तूर्यघोषैः प्रहर्षितः । संविशेत्तु यथाकालमुत्तिष्ठेच्च गतक्लमः ।।
वहाँ (रनिवास) में बाजाओं के शब्दों से प्रहर्षित होकर कुछ भोजनकर यथासमय सो जावे और श्रमरहित होकर शेष रात्रि में उठ (जग) जावे।
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