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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 5
यस्मादेषां सुरेन्द्राणां मात्राभ्यो निर्मितो नृपः । तस्मादभिभवत्येष सर्वभूतानि तेजसा ।।
चूँकि राजा इन्द्र आदि सब देवों के नित्य अंश से रचा गया है, इस कारण यह (राजा) से सब जीवों को अभिभूत (पराजित) करता है।
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