मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 202
साम्ना दानेन भेदेन समस्तैरथवा पृथक्‌ । विजेतुं प्रयतेतारिं न युद्धेन कदाचन ।।
(राजा) साम (प्रेम-प्रदर्शन), दान, भेद (शत्रु के राज्यार्थी दायाद या मन्त्री आदि को विजय होने पर राज्य आदि का लोभ देकर अपने पक्ष में करना) इन तीनों उपायों से अथवा इनमें से किसी एक या दो उपायों से शत्रुओं को जीतने का प्रयत्न करे। (पहले) युद्ध से जीतने की कदापि चेष्टा न करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें