(राजा) साम (प्रेम-प्रदर्शन), दान, भेद (शत्रु के राज्यार्थी दायाद या मन्त्री आदि को विजय होने पर राज्य आदि का लोभ देकर अपने पक्ष में करना) इन तीनों उपायों से अथवा इनमें से किसी एक या दो उपायों से शत्रुओं को जीतने का प्रयत्न करे। (पहले) युद्ध से जीतने की कदापि चेष्टा न करे।
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