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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 44
इन्द्रियाणां जये योगं समातिष्ठेद्दिवांनिशम्‌ । जितेन्द्रियो हि शक्रोति वशे स्थापयितुं प्रजा: ।।
(राजा) इन्द्रियों को जीतने में सर्वदा प्रयत्नशील रहे; क्योंकि जितेन्द्रिय (राजा) प्रजाओं को वश में रखने के लिए समर्थ होता है।
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