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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 108
एवं विजयमानस्य येऽस्य स्युः परिपन्थिनः । तानानयेद्वशं सर्वान्सामादिभिरुपक्रमैः ।।
यदि वे (विजय में बाधक राजा) पहले तीन उपायों (साम, दाम और भेद) से (अपनी हरकतों को) नहीं छोड़ें तब दण्ड से ही उनको बलपूर्वक वश में करे।
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