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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 19
समीक्ष्य स धृतः सम्यक्‌ सर्वा रञ्जयति प्रजाः । असमीक्ष्य प्रणीतस्तु विनाशयति सर्वतः ।।
शास्तरानुसार यथावत्‌ विचार कर दिया गया दण्ड सब प्रजाओं को अनुरत करता है और बिना विचार किये धनलोभ या प्रमाद से दिया गया दण्ड सब तरफ से (धन-जन का) नाश करता है।
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