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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 110
यथोद्धरति निर्दाता कक्ष धान्यं च रक्षति । तथा रक्षेन्नृपो राष्ट्रं हन्याच्च परिपन्थिनः ।।
जिस प्रकार निकीनी (सोहनी) करनेवाला (किसान खेत में से) घास को उखाड़ता है और धान्य को बचाता है, उसी प्रकार राजा राज्य की रक्षा करे और शत्रुओं का नाश करे।
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