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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 78
पुरोहितं च कुर्वीत वृणुयादेव चर्त्विजः । तेऽस्य गृह्याणिकर्माणि कुर्युर्वैतानिकानि च ।।
(राजा आथर्वण विधि से) पुरोहित और यज्ञ कर्म करने के लिए ऋत्विज्‌ को वरण करे तथा वे लोग (पुरोहित तथा ऋत्विक्‌) इस (राजा) के शान्तिकर्म तथा यज्ञ कर्म को करते रहें।
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