अध्याय 10 — दसवां अध्याय
मनुस्मृति
131 श्लोक • केवल अनुवाद
पौण्ड़क, चौड़, द्रविड, काम्बोज, यवन, शक, पारद, पल्लव, चीन, किरात, दरद और शक (ये भूतपूर्व क्षत्रिय जातियाँ क्रियालोपादि के कारण शूद्रत्व को प्राप्त हो गयी हैं)।
जल, शस्त्र (सब प्रकार का हथियार या लोहा); विष, माँस, सोम नामक लतर, सर्वबिध गन्ध (कस्तूरी आदि), दूध, मधु (शहद), दही, घी, तेल, मोम, गुड और कुशा (को आपत्ति काल में भी ब्राह्मण-क्षत्रिय नहीं बेचे)।
सब प्रकार के जङ्गली (हाथी आदि) पशु, दांत वाले (सिंह, बाघ, चित्ता, कुत्ता आदि) पशु, पक्षी, जलजन्तु (मछली, मगर, कच्छप आदि), मदिरा, नील, लाख (चपड़ा लाही), एक खुर वाले (घोड़ा आदि पशु) को (आपत्तिकाल में पड़ा हुआ भी ब्राह्मण क्षत्रिय) नहीं बेचे।