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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 130
एते चतुर्णा वर्णानामपद्धर्माः प्रकीर्तिताः । यान्सम्यगनुतिष्ठंतो व्रजन्ति परमां गतिम्‌ ।।
(भृगुजी महर्षियों से कहते हैं कि मैंने) चारों वर्णो के लिए आपत्ति काल के इस (१०।८१-१२९) धर्म को कहा, इसका यथायोग्य पालन करते हुए वे (ब्राह्मणादि चारों वर्ण) श्रेष्ठ गति को प्राप्त करते हैं।
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