शनकैस्तु क्रियालोपादिमाः क्षत्रियजातयः ।
वृषलत्वं गता लोके ब्राह्मणातिक्रमेण च ।।
इन क्षत्रिय जातियों ने धीरे-धीरे क्रिया (यज्ञोपवीत संस्कार तथा सन्ध्यावन्दनादि क्रिया) के लोप होने (छूट जाने) तथा ब्राह्मणों के दर्शन (के बिना यज्ञ, अध्ययन तथा प्रायश्चित्तादि) के अभाव होने से लोक में शूद्रत्व को प्राप्त कर लिया है।
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