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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 80
वेदाभ्यासो ब्राह्मणस्य क्षत्रियस्य च रक्षणम्‌ । वार्ताकर्मैव वैश्यस्य विशिष्टानि स्वकर्मसु ।।
ब्राह्मण का साङ्ग वेदाध्यापन, क्षत्रिय का रक्षा करना और वैश्य का पशुपालन करना- ये कर्म इनकी जीविकार्थ अपने कर्मो में कहे गये हैं।
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