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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 44
पुण्ड्काश्चोडद्रविडाः काम्बोजा यवनाः शकाः । पादापहृवाश्चीनाः किराता दरदाः खशाः ।।
पौण्ड़क, चौड़, द्रविड, काम्बोज, यवन, शक, पारद, पल्लव, चीन, किरात, दरद और शक (ये भूतपूर्व क्षत्रिय जातियाँ क्रियालोपादि के कारण शूद्रत्व को प्राप्त हो गयी हैं)।
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