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मनुस्मृति • अध्याय 10 • श्लोक 89
आरण्यांश्च पशून्सर्वान्दिष्ट्रिश्च वयांसि च । मद्यं नीलीं च लाक्षां च सर्वाश्चैकशफास्तथा ।।
सब प्रकार के जङ्गली (हाथी आदि) पशु, दांत वाले (सिंह, बाघ, चित्ता, कुत्ता आदि) पशु, पक्षी, जलजन्तु (मछली, मगर, कच्छप आदि), मदिरा, नील, लाख (चपड़ा लाही), एक खुर वाले (घोड़ा आदि पशु) को (आपत्तिकाल में पड़ा हुआ भी ब्राह्मण क्षत्रिय) नहीं बेचे।
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